‘माझ्या मृत्यूनंतर मला दोन एकर जमीन हवी आहे’: मीर जाफरच्या वंशजांची नावे मतदार यादीतून वगळण्यात आली.

सैय्यद आमिर मिर्ज़ा की तरह ही सैय्यद रेज़ा अली मिर्ज़ा भी मीर जाफ़र के वंशज हैं. उन्हें यहां लोग ‘छोटे नवाब’ के रूप में जानते हैं. परिवार के बाकी सदस्यों की तरह ही वो भी मुर्शिदाबाद के लालबाग स्थित निज़ामत क़िला परिसर में रहते हैं.
वो बताते हैं कि उन्हें जब इस बात की ख़बर लगी कि उनका और उनके परिवार के दूसरे लोगों का नाम इस बार की मतदाता सूची से हटा दिया गया है…तब उन्हें दो दिनों तक नींद नहीं आई.
सैय्यद रेज़ा अली मिर्ज़ा का कहना है, ”मैं दो रात नहीं सोया. मैं 82 साल का हो गया. सालों से वोट दे रहा हूं. कभी ऐसा वाकया नहीं हुआ.”
वो पूछते हैं, ”हमने क्या अपराध किया है कि तुम भारतीय नागरिक नहीं मान रहे हो, मेरा वोटर लिस्ट से नाम क्यों काट दिए हो भाई? मेरे बाप-दादा तीन सौ साल हुकूमत कर के गए, सिराजुद्दौला, उनके बाप-दादा सब हुकूमत कर के गए, मेरे नाना ने मुर्शिदाबाद ज़िले को आज़ादी दिलाई, भारत में शामिल करवाया…तो फिर मेरा नाम और हमारी पीढ़ी का नाम क्यों हटाया भाई?”




